सनातन मंथन, शिक्षा और संस्कार का संगम हरिद्वार की कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित किया गया “सनातन मंथन” सन्त सम्मेलन का भव्य कार्यक्रम
हरिद्वार की कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित “सनातन मंथन” सन्त सम्मेलन भव्य कार्यक्रम में आध्यात्मिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों, महामंडलेश्वरों एवं धर्मगुरुओं ने सहभागिता करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उपाध्यक्ष श्रेयांश जैन, निदेशक चारु जैन ने सभी संतो को नमन करते हुए कार्यक्रम में पहुंचने पर उनका हृदय की गहराइयों से जोरदार स्वागत किया।

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति ओर संस्कारों से भटक गई है, जिन बच्चों के ऊपर माता पिता का आशीर्वाद नहीं होता, वह जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकते, उन्होंने बताया कि सनातन संस्कृति में जब बच्चे उठते है, तो सबसे पहले उन्हें मां-बाप को प्रणाम करना चाहिए और उनके पैर छूने से दीर्घायु मिलती है, जीवन में सफलता ओर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने वेस्टर्न कल्चर को छोड़कर आयुर्वेद अपनाने की सलाह दी।
वहीं प्रयागराज से पहुंचे महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी ने जीवन में परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला, ओर कहा कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया की रील स्क्रॉल करने में ज्यादा बिजी रहती है, जबकि उन्हें गीता ओर वेद जैसे धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर जीवन में आगे बढना चाहिए।

