धर्मनगरी हरिद्वार में ड्रग विभाग से लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि अगर आपके पास सभी जरूरी कागजात और दस्तावेज पूरे हैं, तब भी लाइसेंस जारी करवाने के लिए आपको विभाग के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। आवेदकों की शिकायतों के मुताबिक, बिना किसी बिचौलिए के काम समय पर कराना मुश्किल हो रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ फार्मासिस्टों के आवेदन करने के महज दो से तीन दिन के भीतर ही लाइसेंस अप्रूव होने की बात सामने आ रही है, जबकि कुछ फार्मासिस्ट सभी जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद लगातार विभाग के चक्कर काटने और परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में यह अंतर क्यों है? जब दस्तावेज, नियम और लाइसेंस की प्रक्रिया सभी के लिए समान हैं, तो कुछ आवेदकों का लाइसेंस महज दो-तीन दिन में कैसे अप्रूव हो जा रहा है, जबकि दूसरों को लंबे समय तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? आवेदकों के बीच यह आरोप भी चर्चा का विषय है कि समय पर काम कराने के लिए बिचौलियों का सहारा लेना पड़ सकता है। यानी लाइसेंस बनवाना है तो दलाल पकड़िए और समय पर काम करवाइए! हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह ड्रग विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
सवाल सीधे लाइसेंस जारी करने वाले लाइसेंस अथॉरिटी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर है। आखिर ऐसी क्या वजह है कि कुछ फार्मासिस्टों के आवेदन महज दो से तीन दिन में अप्रूव हो जाते हैं, जबकि कुछ फार्मासिस्ट पूरे दस्तावेज जमा करने के बाद भी लगातार चक्कर काट रहे हैं? क्या सभी आवेदनों की जांच एक समान प्रक्रिया और तय समयसीमा के तहत की जा रही है, या फिर आवेदकों के साथ अलग-अलग व्यवहार हो रहा है? ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे इन सवालों के बीच यह भी जांच का विषय है कि क्या कुछ फार्मासिस्टों पर विभाग की विशेष मेहरबानी है, जिसके चलते उनके लाइसेंस तेजी से अप्रूव हो रहे हैं, जबकि दूसरे आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि आवेदन करने के दो से तीन दिन में लाइसेंस अप्रूव हो सकता है, तो दूसरे आवेदनों के निस्तारण में देरी का कारण क्या है? क्या लंबित आवेदनों में कोई तकनीकी या दस्तावेज संबंधी कमी है, या फिर प्रक्रिया में कहीं अनावश्यक देरी हो रही है? ड्रग विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और लाइसेंस अथॉरिटी को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। साथ ही, आवेदनों के निस्तारण में लगने वाले समय, लंबित मामलों और तेजी से अप्रूव हुए लाइसेंसों की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर कुछ फार्मासिस्टों के काम इतनी जल्दी कैसे हो रहे हैं और कुछ को बार-बार चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं। लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, न कि ऐसी कि आवेदकों को समय पर काम कराने के लिए दलालों का सहारा लेने की जरूरत महसूस हो।

