दिल्ली क्राइम ब्रांच की हरिद्वार में दस्तक! नकली दवाओं के तार फिर जुड़े? फरार आरोपी के लाइसेंस आवेदन और ड्रग विभाग की निगरानी पर सवाल
दिल्ली में नकली दवाओं के मामले में बड़ी कार्रवाई के बाद अब तार हरिद्वार के रायपुर स्थित लक्ष्मी हेल्थ केयर से जुड़ने की बात सामने आई है। क्राइम ब्रांच की टीम जब कंपनी पहुंची तो वहां ताला बंद मिला। कंपनी के स्वामी पराग त्यागी के फरार होने की बात सामने आने के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या हरिद्वार में भी नकली दवाओं का नेटवर्क फिर सक्रिय हो रहा है? आखिर क्राइम ब्रांच की टीम के पहुंचने पर कंपनी बंद क्यों मिली और क्या अब कंपनी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी? इस पूरे मामले में हरिद्वार के ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। **एक वरिष्ठ अधिकारी को हरिद्वार की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बावजूद नकली दवाओं के मामले के तार यहां तक जुड़ना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।** क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था प्रभावी है या फिर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की जरूरत है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फरार आरोपी ने दोबारा नए लाइसेंस के लिए आवेदन किया है? सूत्रों के मुताबिक, नए लाइसेंस के लिए आवेदन किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में संबंधित विभागों को आवेदन की स्थिति और उद्देश्य की गहन जांच करनी चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बंद कंपनी की प्रभावी निगरानी हो, ताकि किसी भी संभावित अवैध गतिविधि को रोका जा सके। क्या बंद कंपनी के पीछे कोई नई तैयारी चल रही है या लाइसेंस आवेदन की कोई दूसरी वजह है? वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी तय होने के बाद भी ऐसे सवाल उठना ड्रग विभाग की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करता है। इन सभी सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।

