हरिद्वार में वनाग्नि से निपटने की तैयारी:मनसा देवी टेम्पल पहाड़ी पर दो दिवसीय मॉक ड्रिल का सफल आयोजन।
हरिद्वार मे आगामी फायर सीजन को देखते हुए वन संपदा की सुरक्षा और आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर मॉक अभ्यास आयोजित किया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में मनसा देवी पहाड़ी क्षेत्र में आयोजित इस विशेष अभ्यास में विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से भाग लेकर आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन किया।10:30 बजे मिली सूचना, तत्काल हरकत में आया कंट्रोल रूम।

आपदा कंट्रोल रूम को प्रातः 10:30 बजे सूचना प्राप्त हुई कि मनसा देवी पहाड़ी पर वनाग्नि की घटना सामने आई है। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन टीम को तुरंत राहत एवं बचाव कार्य के लिए रवाना किया गया।घटनास्थल पर पहुंचते ही टीमों ने आग को नियंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की और आग की चपेट में आए लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।
तीन लोग घायल, एक को किया गया हायर सेंटर रेफर मॉक अभ्यास के दौरान परिकल्पित परिदृश्य में तीन लोग वनाग्नि की चपेट में आ गए थे। आपदा प्रबंधन टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहाड़ी क्षेत्र से तीनों घायलों को सुरक्षित निकाला और एंबुलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय भेजा। • दो घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। • एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहतर उपचार हेतु हायर सेंटर रेफर किया गया।
इसके अतिरिक्त आग की चपेट में आया एक चीतल शावक भी घायल पाया गया, जिसे उपचार के लिए चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भेजा गया।दो दिवसीय विशेष अभ्यास कार्यक्रम यह अभ्यास राजाजी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत मानसा देवी क्षेत्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम दो चरणों में संपन्न हुआ।
वन संपदा संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम प्रभागीय वनाधिकारी एवं इंसीडेंट कमांडर ने बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं था, बल्कि विभागीय समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परीक्षण भी था।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में आयोजित इस दो दिवसीय मॉक अभ्यास ने यह संदेश दिया कि प्रशासन आगामी फायर सीजन के लिए पूरी तरह तैयार है। वन संपदा, वन्यजीव और नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन की तत्परता इस अभ्यास में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।हरिद्वार में आयोजित यह संयुक्त अभ्यास भविष्य में वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटने के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

