सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं, जाति-पात और राजनीति से ऊपर उठकर भारत को बनाना होगा विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था: स्वामी रामदेव
हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय आयोजन के पहले दिन उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में बुक फेयर का उद्घाटन किया। इस दौरान स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म, वेदों और प्राचीन भारतीय ग्रंथों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बिना सही जानकारी के सनातन धर्म, देवी-देवताओं और महापुरुषों पर टिप्पणी करने वालों को कानूनी कार्रवाई के साथ तार्किक जवाब भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लोगों को अपनी आध्यात्मिक विरासत व प्राचीन संस्कृति के प्रति जागरूक होना चाहिए।
अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के लिए करीब 68 करोड़ डॉलर के पैकेज को लेकर पूछे गए सवाल पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने भारत की आर्थिक, वैज्ञानिक और सामरिक ताकत बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए देशवासियों को जाति-पात, ऊंच-नीच, पक्ष-विपक्ष और धार्मिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सोचना होगा। स्वामी रामदेव ने कहा कि जीडीपी, विकास दर, वैज्ञानिक क्षमता और सैन्य शक्ति को मजबूत करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक नागरिक राष्ट्र के विकास को प्राथमिकता देगा और राष्ट्रीय चेतना के साथ आगे बढ़ेगा, तभी भारत दुनिया में अपनी गौरव, गरिमा और प्रतिष्ठा को और मजबूत कर सकेगा।


