नकली दवाओं के गिरोह पर सीबीआई का शिकंजा, उमेश राठी गिरफ्तार; पराग त्यागी अब भी फरार!
हरिद्वार में नकली दवाओं के नेटवर्क पर लगातार छापेमारी से उठे सवाल, आखिर कहां बन रही हैं नकली दवाएं और कौन कर रहा निगरानी?
हरिद्वार। नकली दवाओं के कथित कारोबार की जांच में सीबीआई की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। रिमांड पर लिए गए दो आरोपियों की निशानदेही पर जांच एजेंसी ने उमेश राठी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उमेश राठी नकली दवाओं से जुड़े बिल तैयार करता था। वहीं, इस पूरे प्रकरण में पराग त्यागी अब भी फरार बताया जा रहा है, जिसे मामले का प्रमुख आरोपी माना जा रहा है। भगवानपुर और रुड़की क्षेत्र में लगातार छापेमारी से नकली दवाओं के कारोबार के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि कथित तौर पर नकली दवाएं कहां तैयार की जा रही थीं, उनकी पैकिंग और बिलिंग कैसे होती थी और उन्हें बाजार तक पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था।
इस पूरे मामले ने हरिद्वार के औषधि निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जिले में नकली दवाओं का निर्माण या उनकी रीपैकेजिंग हो रही थी, तो संबंधित विभागों की निगरानी में इसकी भनक क्यों नहीं लगी? दवा कंपनियों के लाइसेंस, उत्पादन इकाइयों के निरीक्षण, दवाओं की गुणवत्ता और बिलिंग व्यवस्था की नियमित जांच कितनी प्रभावी रही? सीबीआई की लगातार दबिश इस मामले की गंभीरता को सामने ला रही है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में और किन लोगों के नाम सामने आते हैं और कथित नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दवाओं के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा था, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और निगरानी व्यवस्था आखिर कहां चूक गई? हालांकि, मामले के सभी आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

