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यवाओं के विचारों से तय होगी ओटीटी मंचों पर महिलाओं की गरिमा और सशक्तिकरण की नई दिशा : राष्ट्रीय महिला आयोग

ByArjun Burman

Oct 31, 2026
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यवाओं के विचारों से तय होगी ओटीटी मंचों पर महिलाओं की गरिमा और सशक्तिकरण की नई दिशा : राष्ट्रीय महिला आयोग

महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सशक्तिकरण को डिजिटल दुनिया में भी सुनिश्चित करने तथा नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग द्वारा 30 एवं 31 अक्टूबर, 2026 को ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, देहरादून में ‘युवा संवाद – मॉक राष्ट्रीय महिला आयोग सलाहकार समिति’ का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर ने किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल भी उपस्थित रहीं।

देहरादून से शुरू हुई यह पहल देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य युवाओं को महिलाओं से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श करने, नीतिगत सुझाव देने और महिला सशक्तिकरण से संबंधित निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करना है।

कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘ओटीटी मंचों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व’ रहा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने ओटीटी मंचों पर महिलाओं की भूमिका, उनकी गरिमा, स्वतंत्रता, सुरक्षा और वास्तविक सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।

दो दिवसीय संवाद के दौरान प्रतिभागियों को पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया, जिनमें ओटीटी मंच, युवा, महिला कलाकार, नागरिक समाज एवं महिला अधिकार संगठन तथा सरकार एवं नियामक संस्थाएं शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने अलग-अलग हितधारकों के दृष्टिकोण से विषय का विश्लेषण किया और चर्चा के माध्यम से एक-दूसरे के विचारों पर सवाल-जवाब भी किए।

दूसरे दिन चर्चा का प्रमुख विषय रहा कि क्या ओटीटी मंचों पर दिखाए जा रहे आधुनिक कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण हो रहा है या फिर ‘बोल्डनेस’, ‘स्वतंत्रता’ और ‘रचनात्मक अभिव्यक्ति’ के नाम पर अश्लीलता, हिंसा और महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार को सामान्य बनाया जा रहा है।

इस विषय पर छह कार्य समूह बनाए गए। इनमें महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और दुर्व्यवहार का चित्रण, ओटीटी सामग्री में पुरुष दृष्टिकोण का प्रभाव, महिलाओं के चरित्रों में रूढ़िवादी सोच, सूचना प्रौद्योगिकी नियम एवं नियामक व्यवस्था, शूटिंग के दौरान महिला कलाकारों की सुरक्षा तथा लेखन समूहों में महिलाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने ओटीटी मंचों पर महिलाओं के सम्मानजनक चित्रण के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए। इनमें कंटेंट की निगरानी के लिए पारदर्शी व्यवस्था, स्पष्ट चेतावनी संदेश, मजबूत अभिभावकीय नियंत्रण व्यवस्था, महिलाओं के प्रति अपमानजनक सामग्री पर समयबद्ध कार्रवाई, ओटीटी मंचों की जवाबदेही तय करना तथा महिला कलाकारों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना प्रमुख रहे।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवाओं को केवल विचार रखने तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक नीति निर्माण से जोड़ना भी है। इस पहल के तहत विभिन्न मॉक राष्ट्रीय महिला आयोग सलाहकार समिति कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चयनित प्रतिभागियों को राष्ट्रीय महिला आयोग की वास्तविक ‘युवा सलाहकार समिति’ का सदस्य बनने का अवसर दिया जाएगा। इस प्रकार देशभर के युवाओं को महिला अधिकारों और नीतिगत विषयों पर आयोग के साथ जुड़कर काम करने का मंच मिलेगा।

कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के अनुभव साझा करने के सत्र के साथ हुआ, जिसमें युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।

राष्ट्रीय महिला आयोग की यह पहल युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और विचारों को महिला अधिकारों की दिशा में सार्थक बदलाव का माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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