मंडल अध्यक्ष की अनदेखी या सियासी चाल?स्वागत कार्यक्रम में नहीं बुलावा, बैनर से भी किया किनारा
भाजपा की संगठनात्मक परंपरा पर उठे गंभीर सवाल
ज्वालापुर विधानसभा के पूर्वी मंडल में आयोजित कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के स्वागत कार्यक्रम ने अब सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। कार्यक्रम में जहां एक ओर बड़े स्तर पर स्वागत की तैयारियां की गईं, वहीं दूसरी ओर भाजपा के पूर्वी मंडल अध्यक्ष को न तो सूचना दी गई और न ही बैनर-पोस्टरों में उनका स्थान दिखाई दिया। यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी स्वयं को संगठन आधारित पार्टी मानती है, जहां हर पदाधिकारी का सम्मान और सहभागिता प्राथमिकता में रहता है। ऐसे में मंडल अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद को नजरअंदाज करना केवल एक चूक नहीं, बल्कि कई सवालों को जन्म देता है।
सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह केवल लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है? मंडल अध्यक्ष का अनुसूचित जाति वर्ग से होना भी इस पूरे घटनाक्रम को एक संवेदनशील मोड़ देता है। क्या सामाजिक संतुलन की अनदेखी की गई है या फिर स्थानीय स्तर पर गुटबाजी हावी है? इस मुद्दे पर अब यह अपेक्षा की जा रही है कि माननीय मंत्री मदन कौशिक, जिलाध्यक्ष आशुतोष और भाजपा प्रदेश नेतृत्व स्वयं संज्ञान लें और स्पष्ट करें कि संगठन की मूल विचारधारा के विपरीत यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। जवाब जरूरी है, क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संगठन की कार्यशैली और उसकी विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।
